जब मर्म पुराना जगता है

जब मर्म पुराना जगता है, मत पूछो कैसा लगता है। दिल में होता है दर्द कोई, और मन ये रोने लगता है। आँखें पथरा सी जाती हैं, और साँसें भी थम जाती हैं, कितना भी रोकूँ अश्कों को, वो मुझको नम...

प्रिये, मैं तुममें हूँ सदा

प्रिये, मैं तो तुममें ही रहा हूँ सदा कुछ नहीं होने की तरह सदा सुलभ रहा तुम्हारे लिए बस तेरी एक आलिंगन की प्रतीक्षा में और सबकुछ हो जाने की सनक में। और तुम? तुम भी मुझमें रही हमेशा किसी भयावह...

कौन से रंग का दिल है तेरा

कौन से रंग का दिल है तेरा, चाहता क्या है? लटपट सी जबान ये तेरी कहती क्या है? चंचल सा जो मन है तेरा, सोचे क्या है? बहके से हैं कदम तुम्हारे, चला कहाँ है?   कर सकता है सामना तो...